पीएम श्री सेजस करतला में विश्व आदिवासी दिवस का सेलिब्रेशन

चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
मो.7440269778

पीएम श्री सेजस करतला में विश्व आदिवासी दिवस का सेलिब्रेशन

बच्चों का छत्तीसगढ़ महतारी, भारत माता और आदिवासी बाला के परिधान में प्रस्तुति आकर्षण आकर्षण का केंद्र


करतला//पीएम श्री सेजस करतला में सांकेतिक रूप से विश्व आदिवासी दिवस SMDC अध्यक्ष श्री आकाश सक्सेना के मुख्य आतिथ्य और प्रभारी प्राचार्य श्री दुबराज सिंह राठिया की अध्यक्षता में आयोजित की गई। कार्यक्रम की शुरुआत छ.ग.महतारी, बिरसा मुंडा का पूजन कर की गई।‌ बालिकाओं द्वारा अतिथियों का आदिवासी परंपरा में सांकेतिक रूप से थाली लोटा में हाथ धुलाकर और हल्दी चावल का तिलक लगाकर स्वागत किया गया‌। उसके बाद बच्चों के द्वारा आदिवासी संस्कृति परंपरा पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया जिसमें हम तो आदिवासी आन गाने पर थिरकते दिखे । यह कार्यक्रम केवल एक दिन पूर्व ही तय की गई और‌ पूरी तरह बच्चों द्वारा संचालित थी जिसमें मंच संचालन, कार्यक्रम की रूपरेखा, संसाधन जुटाने आदि ।
कार्यक्रम में बच्चों द्वारा आदिवासी वेशभूषा में आदिवासी बाला बनकर छत्तीसगढ़ी में जय जोहार, जय आदिवासी का उद्घोष करना अद्भुत था । वहीं छत्तीसगढ़ महतारी और भारत माता के रूप में बच्चों का मंच में आगमन और माटी की महिमा बता अपना परिचय देना लाजवाब रहा। आदिवासी के रूप में धरती आबा युवा बिरसा मुंडा का मंच पर आगमन और अंग्रेजी शासन का धुर-विरोधी के रूप में प्रस्तुत होना आकर्षण का केंद्र था ।
कार्यक्रम को मुख्य अतिथि श्री आकाश सक्सेना ने संबोधित करते हुए कहा कि हम आदिवासी समाज के बीच में रहते हैं तो स्वाभाविक है हम जाने अंजाने में उनके अधिकांश संस्कृति का अनुसरण करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हमें आदिवासी समाज प्रकृति का संरक्षण और‌ अपनापन सिखाता है। कार्यक्रम को व्याख्याता मनोज तिग्गा ने भी संबोधित किया उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज सबसे बड़ी विशेषता होती है वह है सबको साथ लेकर चलना।
अंत में प्रभारी प्राचार्य श्री दुबराज सिंह राठिया ने आदिवासी दिवस के महत्व बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र संघ महासभा का 9 अगस्त 1984 की प्रथम बैठक की‌ याद में सन 1995 से मनाए जाने की बात बताई। उन्होंने आगे चर्चा करते हुए बताया कि आदिवासी समाज कैसे प्रकृति से जुड़े हैं, जैसे शादी का भांवर, एंटी क्लॉक वाइज, आदिवासी देवी-देवताओं का स्थान पेड़ के नीचे पत्थर पर स्थापना आदि। इसके पश्चात उन्होंने मुख्य अतिथि का आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए बच्चों को धन्यवाद किया।
कार्यक्रम का संचालन छत्तीसगढ़ी में ईष्था महंत, हिंदी में रागिनी पटेल तथा अनिमा अगरिया ने किया ।

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