बलरामपुर से सुशील श्रीवास्तव की रिपोर्ट
बलरामपुर के ग्रामीण इलाको के अलावा बलरामपुर शहर में भी राप्ती नदी के बाढ़ का असर 170 सालों का रिकार्ड तोड़ा
राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 96 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। जिले के करीब 355 गांव और यहां की करीब सवा दो लाख आबादी बाढ़ की चपेट में आ गई है।
बलरामपुर नगर के कुछ मोहल्लों में नाव चल रही है। प्रशासन राहत व बचाव कार्य में जुटा है। नेशनल हाईवे सहित कई मार्गों पर बाढ़ का पानी बहने से आवागमन प्रभावित हो रहा है। बाढ़ में करीब 70 हजार हेक्टेअर धान व गन्ने की फसल पानी में डूब गई है। जिले के 405 विद्यालयों में बाढ़ का पानी भर गया है।
और तो और बाढ़ बलरामपुर शहर मे भी घुस गया है और बलरामपुर शहर में भी नाव चलाया जा रहा है।
जिला प्रशासन और समाजसेवी संगठनों ने बाढ़ पीड़ितों के सहायता के लिए कमर कस लिया है और जिला प्रशासन अपने दफ्तरों से निकल कर गावों/गलियों में पहुंचकर जायजा लेकर बचाव कार्य में जी जान से जुट गए हैं।
जनपद में राप्ती नदी का जलस्तर हाईएस्ट फ्लड बिंदु को पार करते हुए 105.610 पहुंच गया है जो कि खतरे के निशान 104.62 से 0.99 सेंटीमीटर ऊपर है। जनपद के कई क्षेत्र बाढ़ से प्रभावित है। जनपद में सर्वाधिक प्रभावित तहसील जनपद बलरामपुर सदर है।
जिलाधिकारी डॉ महेंद्र कुमार एवं पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सक्सेना द्वारा राप्ती नदी सिसई घाट पहुंचकर बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया गया एवं ग्राम सिसई में बाढ़ की स्थिति देखी गई, उन्होंने उपजिलाधिकारी को राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर किए जाने का निर्देश दिया। बाढ़ से प्रभावित लोगों को तत्काल भोजन एवं पेयजल की व्यवस्था प्रदान किए जाने, उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फसे लोगों को नावो के माध्यम से तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाए जाने का निर्देश दिया,
नावों में रस्सी एवं लाइव जैकेट की उपलब्धता का निर्देश दिया। उन्होंने आम जनमानस से अपील किया कि राप्ती नदी के बढ़ते जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के लोग पानी बढ़ने का इंतजार न करें एवं अपने नजदीकी राहत केंद्र में शरण लें।
इस दौरान मेवालाल चौकी के पास तेज धारा को पार करते हुए बाइक सवार का तेज धारा में बहते हुए देख जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा तत्काल पुलिस कर्मियों को व्यक्ति को बचाने के लिए को निर्देशित किया गया। पुलिस कर्मियों द्वारा वाहन में रस्सा निकाल कर तुरंत फेंका गया तथा डूबते हुए व्यक्ति को बचाया गया। जिलाधिकारी द्वारा मेवा लाल चौकी के बाद हल्के वाहनों के आवागमन पर रोक लगाए जाने एवं सड़क के दोनों तरफ है रस्सा लगाए जाने का निर्देश दिया गया।
प्रशासन ने एनडीआरएफ की टीम बुला ली है। शाम तक हालात और खराब हो सकते हैं। एसडीआरएफ की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुट गई हैं।