20 हजार रुपए लेने के बाद जयप्रकाश अस्पताल ने परिजनों को सौंपा जेना सोय शव

किरीबुरु के युवक जेना सोय (17 वर्ष) का शव मौत के लगभग 33 घंटे बाद 25 जुलाई को दोपहर लगभग 12.30 बजे राउरकेला के जयप्रकाश अस्पताल प्रबंधन ने 20 हजार रुपये लेने के बाद अंततः परिजनों को पोस्टमार्टम कराने हेतु सौंप दिया है।मृतक की मां अश्रिता सोय ने बताया कि आज भी सुबह अस्पताल प्रबंधन बकाया पैसे की जिद्द पर अडे़ रहते हुये शव नहीं दे रहा था। इसके बाद मैं ब्राह्मणी थाना गई व वहां से पुलिस से मदद मांगी।इसके बाद पुलिस अस्पताल आई, लेकिन फिर भी अस्पताल प्रबंधन ने शव देने से इंकार कर दिया।बाद में जब हमने 20 हजार रुपये जमा किया, तब जाकर प्रबंधन ने शव सौंपा।अब शव का पोस्टमार्टम कराने हम ओडिशा पुलिस के साथ जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि उक्त अस्पताल ने मेरे बेटे के इलाज पर 3 लाख 25 हजार रुपये का बिल दिया था। हमने 24 जुलाई तक 2 लाख 80 हजार रुपये जमा किए थे, फिर भी वह शव नहीं दे रहा था। आज पुनः 20 हजार रुपये हमसे लेने के बाद हमें शव दिया गया। हमने मानवता को शमर्शार करने वाली ऐसी घटना पहले सिर्फ सुनी थी लेकिन आज देख भी ली।ऐसा अस्पताल सिर्फ मरीजों को लूटने व शोषण करने वाला है।वहीं, दूसरी तरफ खबर छपने के बाद किरीबुरु-मेघाहातुबुरु व आसपास के लोग खुलकर मदद के लिये आगे आने लगें। किरीबुरु पश्चिम पंचायत की मुखिया पार्वती किडो, ठेकेदार वेल्फेयर एसोसिएशन, जीईएल चर्च, प्रभात मिंज, संतोष पंडा आदि अनेक लोगों ने अस्पताल का बकाया बिल का भुगतान कर शव को लेने हेतु काफी पैसा जमा कर चुके थे।उल्लेखनीय है कि बीते 15 जुलाई को जेना सोय मोटरसाइकल से ओडिशा के बमबारी से किरीबुरु लौट रहा था, तभी ओम शांति स्थल मंदिर के समीप रात्रि लगभग 8 बजे सड़क दुर्घटना में वह घायल हो गया। जेना को पहले सेल की किरीबुरु अस्पताल लाया गया, लेकिन यहां के चिकित्सकों ने उसकी खराब स्थिति को देख बेहतर इलाज हेतु राउरकेला स्थित आईजीएच अस्पताल रेफर किया।आईजीएच अस्पताल प्रबंधन ने जगह नहीं होने की बात कह जेना सोय को राउरकेला के ही जय प्रकाश अस्पताल ले जाने की बात कही। इसके बाद जेना सोय को 16 जुलाई की सुबह 4 बजे जय प्रकाश अस्पताल में भर्ती कराया गया।जहां 24 जुलाई की सुबह 4 बजे जेना की मौत हो गई। मौत के बाद बकाया पैसा को लेकर 25 जुलाई को जेना का शव परिजनों को नहीं दिया गया अथवा पोस्टमार्टम से संबंधित जरूरी प्रक्रिया पूर्ण नहीं कराई गई।