मंगल ठाकुर
बरठीं बिलासपुर।
नागा बाबा कुटिया शिव गौरी मंदिर सुनहानी के महंत अर्भय गिरी जी महाराज की देखरेख में शिव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में पंडित गोपाल शास्त्री ने कहा कि पापी से पापी मनुष्य संतों की संगत पाने से पाप मुक्त हो जाता है।
अजामिल एक ब्राह्मण था और कुसंग करने के साथ पाप करने लगा।उसके कल्याण के लिए उसकी पत्नी ने एक संत से कहा कि महाराज कोई ऐसा उपाय बताएं जिससे मेरे पति का कल्याण हो सके। संतों ने उसकी पत्नी को कहा कि अपने बेटे का नाम नारायण रखो। जब अंत समय आया तो अजामिल अपने बेटे नारायण को जोर-जोर से आवाज लगाने लगा। तभी भगवान खुद नारायण भगवान के रूप में अजामिल के सामने खड़े हो गए अजामिल ने अनजाने में भी भगवान का नाम लिया और मुक्तिधाम को प्राप्त हुए। भगवान के नाम की इतनी महिमा है तो भगवान की भक्ति की कितनी महिमा होगी। ध्रुव के प्रसंग को सुनाकर लोगों को शिक्षा देते हुए कहा कि ध्रुव को सौतेली मां के व्यवहार के कारण जब घर से बाहर निकाल दिया गया। तो खुद ध्रुव जी जब घर आते हैं। सबसे पहले सौतेली मां को प्रणाम करते हैं। उन्होंने उपस्थित जनसमूह को कथा के माध्यम से कहा कि भगवान का नाम यदि कोई अनजाने में भी लेता है तो उसका बेड़ा भी भव से पार हो जाता है उन्होंने आह्वान किया कि सब लोगों को मोह माया के जंजाल से निकलकर भगवान की भक्ति में लीन रहना चाहिए।