कोरबा जिले में हार के बाद भाजपा संगठन संसदीय क्षेत्र में व्यापक फेरबदल की संभावना

चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट

कोरबा जिले में हार के बाद भाजपा संगठन संसदीय क्षेत्र में व्यापक फेरबदल की संभावना

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुश्री सरोज पांडेय को पार्टी ने उतारा था कोरबा लोकसभा चुनाव में

 

 

कोरबा// लोकसभा क्षेत्र कोरबा के गठन के लिए अब तक हुए चार चुनाव में कांग्रेस को तीन बार जीत मिली, जबकि भाजपा के स्व. डॉ. बंशीलाल महतो को एक बार जीत का अवसर प्राप्त हुआ। वर्ष 2024 के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी सुश्री सरोज पांडेय को हार का सामना करना पड़ा। पिछली मिली दो हार के मुकाबले इस बार हार का आंकड़ा सबसे अधिक रहा। संगठन इससे हैरान है।
जिसके बाद संभावना जताई जा रही है कि आगामी दिनों में संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत व्यापक स्तर पर फेरबदल किया जा सकता है। कोरबा सीट पर कांग्रेस की ज्योत्सना महंत दूसरी बार सांसद निर्वाचित हुईं। उनके मुकाबले भाजपा प्रत्याशी सुश्री सरोज पांडेय को 43 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा। जबकि इससे पहले के चुनाव में भाजपा के ज्योतिनंद दुबे की हार का आंकड़ा 26 हजार के आसपास का था। भाजपा संगठन ने काफी विचार मंथन के बाद कोरबा संसदीय सीट से यहां के कार्यकर्ता को किसी भी तरह महत्व देने के बजाय बाहर से प्रत्याशी को उतार दिया। शुरू से भाजपा पार्टी के अंदर-अंदर इसका विरोध होता रहा लेकिन सुश्री सरोज पांडेय के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष होने के कारण विरोध को हवा नहीं मिल सकी। टिकट आबंटन करने वालों से लेकर किसी ने भी इस बारे में हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं समझी। संसदीय क्षेत्र के समीकरण और यहां के हालातों पर ज्यादा बारीकी से अध्ययन करने के बजाय पार्टी ने कई तरह के लहर और बड़े चेहरे के आधार पर शायद यह मान लिया था कि यहां से नैय्या पार होना संभव है, लेकिन पार्टी के बड़े नेता और तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह के द्वारा सभा में कोरबा को लेकर व सीट को फंसा हुआ बताने से स्थिति एक प्रकार से प्रतिकूल हो गई।
आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों में कई प्रकार के कारण पहले से ही भाजपा के लिए गड्ढा साबित होते रहे और इसकी भरपाई इस चुनाव में भी नहीं हो सकी। रही-सही कसर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की उपस्थिति ने पूरी कर दी। कोरबा सीट को प्रतिष्ठा का विषय बनाने वाले नेताओं ने यहां के समीकरणों पर यथासंभव मंथन करने की जहमत भी नहीं उठाई और छत्तीसगढ़ में सभी 11 सीट पर कमल खिलाने की मंशा को अधूरा रहने दिया। चुनाव के नतीजों की घोषणा के बाद से प्रदेश और देश में छत्तीसगढ़ की बात हो रही है जिसमें 10 सीट जीतने के साथ-साथ कोरबा सीट हारने पर भरपूर नजर है। चर्चा इस बात की भी हो रही है कि जिस क्षेत्र से दो कैबिनेट मंत्री दिए गए हैं वहां ऐसा हाल हो गया। संगठन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में अटकलें लगाई जा रही है कि देश में प्रधानमंत्री के शपथ ग्रहण के बाद छत्तीसगढ़ में भले ही सब तरफ ठीक रहे लेकिन कोरबा क्षेत्र में संगठन स्तर पर बड़े बदलाव हो सकते हैं। जबकि जिले के पदाधिकारियों का कहना है कि चुनाव मैनेजमेंट में भिलाई-दुर्ग के लोगों की ज्यादा दखल रही, जो प्रत्याशी चयन के बाद से लेकर पूरे समय यहां डटे रहे। अधिकांश चीजों में उनकी ही चली और इस बारे में उच्च स्तर में भी अवगत कराया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


error: Content is protected !!