सीसीएल कथारा क्षेत्र में विकास की नई रणनीति, रोजगार और उत्पादन दोनों पर फोकस, एकेबी सिंह।

बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल की रिपोर्ट

सीसीएल कथारा क्षेत्र में विकास की नई रणनीति, रोजगार और उत्पादन दोनों पर फोकस, एकेबी सिंह।

बोकारो जिला के सीसीएल कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक एकेबी सिंह ने पत्रकारों के साथ आयोजित औपचारिक भेंट वार्ता में कथारा क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, उत्पादन क्षमता,विकास योजनाओं और कर्मचारियों की सुविधाओं को लेकर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कथारा क्षेत्र का कोयला उत्पादन लक्ष्य 12 लाख टन निर्धारित किया गया है और इसे हासिल करने की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया जा रहा है। कहा कि वर्तमान समय में कथारा क्षेत्र की उत्पादन क्षमता लगभग पांच हजार टन प्रतिदिन है, जबकि अभी करीब दो हजार टन प्रतिदिन कोयला उत्पादन हो रहा है। उत्पादित कोयले को कथारा वाशरी, स्वांग वाशरी को सफ्लाई के अलावा स्टॉक यार्ड में सुरक्षित रखा जा रहा है। बीते वित्तीय वर्ष में कथारा क्षेत्र का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा और निर्धारित लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व में कराए गए विकास एवं तकनीकी कार्यों का सकारात्मक प्रभाव अब उत्पादन और संचालन व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।हालांकि अभी तक नई मशीनों को शामिल नहीं किया गया है,फिर भी उपलब्ध संसाधनों के माध्यम से उत्पादन कार्य सुचारु ढंग से संचालित किया जा रहा है।महाप्रबंधक ने कहा कि एचओएफ और ट्रांसपोर्टर के आने से स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध हो रहे हैं। क्षेत्र में रोजगार देने में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।उन्होंने स्पष्ट किया कि ठेका कार्यों से संबंधित सभी टेंडर नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत संपन्न किए गए हैं। खनन क्षेत्र में पर्यावरणीय मानकों के पालन पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण,सीटीओ सहित सभी आवश्यक मानकों का पूरी तरह अनुपालन किया जा रहा है।पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित खनन सीसीएल की प्राथमिकताओं में शामिल है। कथारा क्षेत्र की आधारभूत सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां 100 प्रतिशत बिजली, पानी और सड़क की व्यवस्था उपलब्ध है।कर्मचारियों के कल्याण को लेकर प्रबंधन पूरी तरह गंभीर है। प्रत्येक माह की पहली तारीख को कर्मचारियों को वेतन भुगतान सुनिश्चित किया जाता है। मेडिकल बिलों का निपटारा एक सप्ताह के भीतर कर दिया जाता है तथा गंभीर मरीजों के रेफर मामलों को तत्काल भेजने की व्यवस्था है।कहा कि जारंगडीह में बंद पड़ी कृष्णा आउटसोर्सिंग परियोजना को पुनः शुरू कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र में कोयला उत्पादन को नई गति मिलेगी। वहीं कथारा कोलियरी से सटी झिरकी बस्ती के समीप लगभग 1.2 लाख टन कोयला उपलब्ध है। बरसात शुरू होने से पहले इस कोयले का उठाव कर लिया जाएगा। इसके बाद वहां जमीन का समतलीकरण कर व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण कराया जाएगा। बहुप्रतीक्षित स्वांग-पिपराडीह परियोजना को दिसंबर 2026 अथवा फरवरी-मार्च 2027 तक पूरी तरह चालू करने की योजना है। परियोजना शुरू होने के बाद कथारा क्षेत्र की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। वार्ता के दौरान क्षेत्र के विकास, उत्पादन वृद्धि, कर्मचारी हित को लेकर की प्रतिबद्धता स्पष्ट रूप से देखने को मिली।

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