मासूम कृष्णा की मौत मामले में परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन, विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग।

मासूम कृष्णा की मौत मामले में परिजनों ने पुलिस अधीक्षक को सौंपा ज्ञापन, विद्युत विभाग के अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच की मांग।

 

राजाखेड़ा क्षेत्र के ग्राम गढ़ी जोनावद निवासी मासूम कृष्णा की 18 जुलाई 2026 को 11 केवी विद्युत लाइन की चपेट में आने से हुई मृत्यु के मामले में मृतक के परिजनों ने शनिवार को पुलिस अधीक्षक धौलपुर विकास सांगवान के राजाखेड़ा दौरे के दौरान विस्तृत ज्ञापन सौंपकर दर्ज मुकदमा संख्या 191/26 की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने तथा दोषी विद्युत विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। भाजपा पार्षद लोकेन्द्रसिंह चौहान व भाजपा मंडल अध्यक्ष जयवीर सिंह के नेतृत्व में मृतक के पिता विजय सिंह पुत्र कुँवर सिंह ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि उनके मकान के ऊपर से गुजर रही 11 केवी विद्युत लाइन को हटवाने के लिए उन्होंने लगभग डेढ़ माह पूर्व से विद्युत विभाग के अधिकारियों से लगातार संपर्क किया था। उन्होंने आरोप लगाया कि राजाखेड़ा विद्युत विभाग के सहायक अभियंता आनंद तिवारी एवं कनिष्ठ अभियंता विशाल जायसवाल द्वारा बार-बार प्रक्रिया में बाधाएं उत्पन्न की गईं तथा लाइन शिफ्टिंग के बदले ₹1.50 लाख की अवैध राशि की मांग की गई। पिता का कहना है कि उन्होंने रिश्वत देने से स्पष्ट इनकार करते हुए विभाग द्वारा जारी होने वाले विधिवत मांग पत्र के अनुसार सरकारी शुल्क जमा कराने की बात कही थी।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि 9 जुलाई 2026 को उन्होंने आवश्यक दस्तावेज एवं स्टाम्प के साथ आवेदन सहायक अभियंता को प्रस्तुत किया था। आरोप है कि अधिकारियों ने एक-दो दिन में मांग पत्र जारी करने और उसके बाद शीघ्र लाइन शिफ्टिंग कराने का आश्वासन दिया, लेकिन न तो मांग पत्र जारी किया गया और न ही कोई कार्रवाई की गई। परिजनों का आरोप है कि यदि समय रहते विभागीय कार्रवाई कर दी जाती तो 18 जुलाई को उनके पुत्र कृष्णा की जान बच सकती थी।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि आवेदन की प्रगति के संबंध में पूछने पर सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे। इसी बीच सहायक अभियंता के चालक द्वारा कथित रूप से ₹1.50 लाख में कार्य कराने का प्रस्ताव भी दिया गया, जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद उनके आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि लाइन शिफ्टिंग के लिए शपथ पत्र अथवा स्टाम्प की कोई अनिवार्यता विभागीय नियमों में नहीं है। इसलिए पुलिस जांच में यह भी शामिल किया जाए कि पूर्व में जिन उपभोक्ताओं की लाइन शिफ्टिंग हुई, उनसे भी क्या इसी प्रकार स्टाम्प मांगा गया था या केवल शिकायतकर्ता को परेशान करने और कथित रूप से अवैध राशि लेने के उद्देश्य से ऐसा किया गया।
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद विभागीय अधिकारियों ने अपनी लापरवाही छिपाने के लिए आवेदन से संबंधित अभिलेखों में बैक डेट से प्रविष्टियां तैयार कीं। उनका कहना है कि 9 जुलाई को दिया गया आवेदन कई दिनों तक जानबूझकर रोके रखा गया तथा बाद में अलग-अलग तिथियों में अग्रेषित दर्शाया गया। उन्होंने मांग की कि इस पूरे रिकॉर्ड को पुलिस अनुसंधान का हिस्सा बनाया जाए। संवाददाता ब्यूरो चीफ मनोज राघव राजाखेड़ा धौलपुर

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