चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
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“ढोल पीटती सरकार… और बूंद-बूंद को तरसती जनता!”
कोरबा में पेट्रोल-डीजल संकट ने खोली सरकारी दावों की पोल

तुमान//कोरबा जिले के ग्रामीण इलाकों में पेट्रोल-डीजल संकट अब विकराल रूप ले चुका है। एक तरफ सरकार छत्तीसगढ़ में ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ जमीनी हकीकत पूरी तरह उलट दिखाई दे रही है। कई पेट्रोल पंपों पर “पेट्रोल नहीं है”, “डीजल खत्म” के पोस्टर लगे हुए हैं और ग्रामीण जनता बूंद-बूंद ईंधन के लिए भटकने को मजबूर है।
तुमान स्थित प्रकृति फ्यूल पेट्रोल पंप पर सुबह से ही पेट्रोल-डीजल नहीं मिलने से लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। बाइक चालक अपनी मोटरसाइकिलों को पैदल ढकेलते नजर आए, तो वहीं किसानों ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि “वादों से खेत नहीं चलते… खेती के लिए डीजल चाहिए।”
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार सिर्फ बयानबाजी और प्रचार में व्यस्त है, जबकि गांवों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। किसानों ने चेतावनी दी कि अगर यही हाल रहा तो खेती-किसानी पूरी तरह प्रभावित हो जाएगी। ट्रैक्टर बंद हो जाएंगे, सिंचाई रुक जाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमरा जाएगी।
बोतली पेट्रोल पंप का हाल भी कुछ अलग नहीं दिखा। आधी रात तक तेल भरवाने वालों की लंबी कतार लगी रही। कई पेट्रोल पंपों पर मोटरसाइकिल चालकों को सिर्फ ₹100 और कार चालकों को ₹500 तक का ही पेट्रोल-डीजल दिया जा रहा है। लोगों में डर है कि आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।
अब सवाल उठता है —
अगर सब कुछ “नियंत्रण” में है, तो फिर जनता सड़कों पर क्यों भटक रही है?
अगर ईंधन पर्याप्त है, तो पंपों पर ताले जैसे हालात क्यों हैं?
ग्रामीण जनता का साफ कहना है कि सरकार को अब भाषण और विज्ञापन छोड़कर जमीन पर उतरना होगा। क्योंकि हालात अब “असुविधा” से आगे बढ़कर “आपदा” जैसे बन चुके हैं।