लखीमपुर खीरी में स्कूल बंद कर कांवड़ियों की सेवा करने का आदेश, BSA बोले- अपनी मर्जी से करें

ब्यूरो चीफ
लखीमपुर खीरी में स्कूल बंद कर कांवड़ियों की सेवा करने का आदेश, BSA बोले- अपनी मर्जी से करें

 


उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) के शिक्षा अधिकारी का एक आदेश सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. इस आदेश के मुताबिक सावन महीने के हर सोमवार को जिले की गोला गोकरन नाथ तहसील के सभी सरकारी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की गई है. साथ ही ये भी कहा गया है कि इन स्कूलों के टीचर कांवड़ यात्रा पर निकले लोगों की सेवा करेंगे. आदेश सभी स्कूलों और वहां पढ़ाने वाले 81 टीचर्स के नाम जारी किए गए हैं. बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के इस आदेश पर सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई. विवाद बढ़ता देख प्रशासन ने कहा है कि आदेश को समझने में कोई दिक्कत हुई है. टीचर्स को बाध्य नहीं किया गया है, बल्कि उन्हें इस काम में वॉलंटियर यानी स्वेच्छा से काम करने के लिए कहा गया है लखीमपुर की गोला तहसील में एक प्राचीन शिव मंदिर है. हर साल यहां सावन के महीने में श्रद्धालु कांवड़ लेकर आते हैं. लेकिन सावन के हर सोमवार को यहां भीड़ ज्यादा होती है. इसलिए मंदिर के तीन किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाले सभी स्कूलों में सोमवार के दिन छुट्टी कर दी जाती है. ऐसा पिछले करीब 10 सालों से हो रहा है.

इस मामले में BSA लक्ष्मीकांत पांडेय का कहना है
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने ये फैसला इसलिए लिया क्योंकि सोमवार के दिन सड़कों पर काफी भीड़ होती है, ट्राफिक को डायवर्ट करना पड़ता है. इससे स्कूली बच्चों को काफी परेशानी होती है. सावन में आमतौर पर चार सोमवार पड़ते हैं, तो महीने में सिर्फ चार दिन छुट्टी की जाएगी.
BSA ने कहा कि, इस बार भी सावन का महीना शुरू हो चुका है. श्रद्धालु कांवड़ लेने के लिए रवाना हो चुके हैं. उनके वापस आने से पहले प्रशासन व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारी कर रहा है. इसी सिलसिले में ये आदेश जारी कर कहा कि 18 जुलाई, 25 जुलाई, 1 अगस्त और 8 अगस्त को स्कूलों में छुट्टी रहेगी. हिंदू कैलेंडर के मुताबिक इन सभी दिनों पर सावन महीने का सोमवार पड़ रहा है
आदेश पर कुछ महिला टीचर्स ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि,

‘कई बार कांवड़िये नशे में रहते है और उनके साथ गलत व्यवहार कर सकते हैं. ऐसे में उन्हें अपनी सुरक्षा की चिंता है और वे इस आदेश के खिलाफ है.

इस पर जवाब देते हुए BSA लक्ष्मीकांत पांडेय का कहना है कि, इस आदेश को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाई जा रही है. BSA ने कहा,

“नोटिस में कहीं भी ये नहीं कहा गया है कि आप इस फैसले को मानने के लिए बाध्य हैं. ये पूरी तरह से स्वैच्छिक है. अगर आपका मन है तो आप जिला प्रशासन की मदद कर सकते हैं नहीं तो कोई बात नहीं.”

इसके साथ ही BSA लक्ष्मीकांत का कहना है कि जो शिक्षक, प्रशासन की मदद करना चाहते हैं, उन्हें सिर्फ कांवड़ लेकर आ रहे श्रद्धालुओं की सामान्य मदद करनी होगी. जैसे कि उन्हें रास्ता बताना, या किसी की तबीयत खराब होने पर फर्स्ट ऐड मुहैया करना. ये सब करने के लिए किसी को भी बाध्य नहीं किया गया है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


error: Content is protected !!