आज दिनांक 24/01/2024 को आरा रोटी बैंक के तत्वाधान में राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर स्थानीय चंदवा मुसहर टोला के आरा रोटी बैंक पाठशाला के सामुदायिक शिक्षण केंद्र में बच्चियों को
स्लेट,कॉपी,किताब,बॉक्स,पेंसिल,रबर,कटर, केक, बिस्किट,चॉकलेट आदि दे कर मनाई गई।

आरा रोटी बैंक के संतोष सिंह भारद्वाज ने बतलाया आरा रोटी बैंक को लगातार चौथे वर्ष ये अवसर मिला राष्ट्रीय बालिका दिवस मनाने को। नेशनल गर्ल्स डे की शुरुआत 24 जनवरी 2008 को महिला एवं बाल विकास मंत्रालय,भारत सरकार द्वारा सर्वप्रथम की गई थी जिसका मुख्य उद्देश्य वंचित वर्ग की बालिकाओं को शसक्त और शिक्षित बनाना।आरा रोटी बैंक बालिकाओं के सशक्तिकरण और पुनरुत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। इसी क्रम में आरा रोटी बैंक पाठशाला की शुरुआत चंदवा टोला के झुग्गी बस्ती में पिछले वर्ष की गई जिससे बच्चियों को सशक्त समृद्ध बनने में मदद मिले।
आरा रोटी बैंक फाउंडेशन की अध्यक्ष सोनाली देवी ने कहा राष्ट्रीय बालिका दिवस बच्चो में लिंग आधारित भेदभाव को मिटाने और बच्चियों किशोरियों के प्रति सम्मान के संकल्प को दोहराने का दिन है। लिंग आधारित भेदभाव किसी भी समाज के लिए अभिशाप है एवम इसे दूर करके ही विकसित तथा स्वस्थ समाज की परिकल्पना को साकार किया जा सकता है।
आरा रोटी बैंक फाउंडेशन के सचिव अखौरी दीपक ने कहा बच्चियों के प्रति सम्मान और उनके अधिकारों के संकल्प दिवस के रूप में भी बनाया गया।चंदवा टोला के बच्चो के लिए निशुल्क सामाजिक पठन पाठन केंद्र की शुरुआत पिछले वर्ष की गई है जिससे यहां के बच्चे बच्चियां भी शशक्त बने और समाज की मुख्यधारा में शामिल हो। आरा रोटी बैंक की पूरी टीम निस्वार्थ भाव से सेवा भावना के साथ जरूरतमंदों के बीच काम कर रही है।
आरा रोटी बैंक फाउंडेशन के कोषाध्यक्ष मुक्तिकांत ने बतलाया कि जब बेटियां पढ़ेंगी तभी समाज विकसित होगा। बालिका दिवस के अवसर पर बच्चियों के बीच पठन पाठन कि सामग्री और कपड़े आदि वितरित किया गया।आरा रोटी बैंक सामाजिक समानता से वंचित वर्ग के लिए कटिबद्ध है और बच्चियों को समाज की मुख्यधारा में जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है।
राष्ट्रीय बालिका दिवस समाज में लड़कियों को समर्थन, नए अवसर प्रदान करता है। यह समाज में लड़कियों के साथ होने वाली असमानता जैसे भेदभाव, शोषण के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है।
आरा रोटी बैंक के द्वारा राष्ट्रीय बालिका दिवस कार्यक्रम को सफल बनाने में मुक्तिकांत,हर्षिता,सुधा,नेहा सिंह,मनीष,राजीव रंजन,यशवीर,राकेश,रोशन,विशाल,अभिषेक ओझा,राजा, टोनू, मोसारिब, मुशरफ आदि का योगदान अभूतपूर्व रहा।धन्यवाद ज्ञापन मुक्तिकांत ने दिया।