बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट
साइबर ठगी होते ही खाते होंगे फ्रीज, बोकारो साइबर थाना में दो इंस्पेक्टर तैनात; 1930 पर तुरंत शिकायत की अपील
बोकारो:साइबर अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई और पीड़ितों को समय पर राहत दिलाने के उद्देश्य से बोकारो पुलिस ने साइबर थाना की कार्यप्रणाली को और मजबूत करने की पहल की है। पुलिस अधीक्षक नाथू सिंह मीणा के निर्देश पर मुख्यालय डीएसपी सह साइबर थाना प्रभारी पवन कुमार ने मंगलवार को सेक्टर-1 स्थित साइबर थाना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जन शिकायतों, लंबित अनुसंधान और साइबर ठगी के मामलों की समीक्षा की तथा मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।निरीक्षण के दौरान साइबर फ्रॉड के मामलों में त्वरित प्रतिक्रिया पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि साइबर ठगी की शिकायत मिलते ही संबंधित बैंक खातों में हुए संदिग्ध लेनदेन को तत्काल फ्रीज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाए, ताकि ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में स्थानांतरित होने से रोका जा सके।इसके साथ ही फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों की शीघ्र सुनवाई कर पीड़ितों को उनकी रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
डीएसपी पवन कुमार ने साइबर अपराधियों के खिलाफ सक्रिय कार्रवाई, छापेमारी और गिरफ्तारी अभियान में तेजी लाने को कहा। उन्होंने समन्वय पोर्टल से प्राप्त सूचनाओं पर प्रभावी कार्रवाई करने तथा साइबर अपराध की जांच में समन्वय, नेटग्रिड, एमआर-जीआरएम पोर्टल और तकनीकी शाखा की उपलब्ध सुविधाओं का अधिकतम उपयोग करने का निर्देश दिया।
साइबर अपराध के मामलों में अनुसंधान और शिकायतों के शीघ्र निष्पादन के लिए साइबर थाना में पुलिस निरीक्षक स्तर के दो अधिकारियों की पदस्थापना की गई है। इनमें पुलिस निरीक्षक आजाद खान और पुलिस निरीक्षक पिंकु कुमार यादव शामिल हैं।
पुलिस के अनुसार, दोनों अधिकारियों की तैनाती से साइबर ठगी से जुड़े मामलों की जांच में तेजी आएगी और पीड़ितों को राहत दिलाने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी।
मुख्यालय डीएसपी पवन कुमार ने आम लोगों से अपील की कि साइबर ठगी का शिकार होने पर बिना किसी देरी के 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके अलावा राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि साइबर ठगी के बाद जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, उतनी ही जल्दी ठगी की रकम को सुरक्षित कराने और अपराधियों तक पहुंचने की संभावना बढ़ेगी।