बोकारो से अनिल बर्नवाल की खास रिपोर्ट
झारखंड की संस्कृति और प्रकृति का जश्न है करमा पर्व, बेरमो में नौ दिनों तक रही धूम

बोकारो जिले के बेरमो अनुमंडल और आसपास के इलाकों में नौ दिवसीय करमा पर्व धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह पर्व झारखंड की समृद्ध संस्कृति और प्रकृति के बीच गहरे संबंध को दर्शाता है।बेरमो प्रखंड के फुसरो, जारंगडीह कोलियरी, कथारा, कुरपनिया, बेरमो, जरीडीह बाजार, बोकारो थर्मल, चंद्रपुरा, पेंक-नारायणपुर और आसपास के इलाकों में करमा पर्व को लेकर खासा उत्साह देखा गया।करमा पर्व के दौरान स्थानीय लोगों ने अपने पारंपरिक गीतों, नृत्यों और पूजा-अर्चना के माध्यम से करम बाबा की पूजा की। इस पर्व में महिलाओं और युवतियों ने अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए करम बाबा से प्रार्थना की और निर्जला उपवास रखा।इस वर्ष लगातार बारिश के बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। सभी ने एकजुट होकर पर्व को धूमधाम से मनाया। स्थानीय लोगों ने झारखंडी संस्कृति को बढ़ावा देने में बढ़-चढ़कर सहयोग किया।करमा पर्व का महत्व सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। यह पर्व लोगों को प्राकृतिक संरक्षण के प्रति जागरूक करता है और सामाजिक सद्भावना को बढ़ावा देता है। मौके पर उपस्थित लोगों ने कहा कि यह पर्व हमें अपनी संस्कृति और पारंपरिक मूल्यों को बचाने का अवसर प्रदान करता है। हमें अपनी नई पीढ़ी को भी इस पर्व के महत्व के बारे में बताना चाहिए ताकि वे भी अपनी संस्कृति को जानें और उसका सम्मान करें।
मंगलवार की रात सभी महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में रात भर करम गीतों पर खूब नृत्य किया और भाई-बहन के अटूट प्रेम के इस पर्व को उत्साह के साथ संपन्न किया।