सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया उपायुक्त का दौरा! आपदा पीड़ित से पारिवारिक सूची के लिए मांगे 200 रुपये, हंगामे के बाद लौटाए गए पैसे

सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया उपायुक्त का दौरा! आपदा पीड़ित से पारिवारिक सूची के लिए मांगे 200 रुपये, हंगामे के बाद लौटाए गए पैसे

रिपोर्ट कौशल पांडेय

 

सतगावां (कोडरमा)। जिले में भ्रष्टाचार पर रोक लगाने और सरकारी कार्यालयों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण और दौरे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ताजा मामला सतगावां अंचल कार्यालय का है, जहां वज्रपात में पत्नी और बेटे को खो चुके एक आपदा पीड़ित से पारिवारिक सूची निर्गत करने के नाम पर 200 रुपये लेने का आरोप सामने आया है। घटना के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर उपायुक्त और वरीय अधिकारियों के दौरे क्या सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गए हैं।
जानकारी के अनुसार कुछ दिन पूर्व वज्रपात की घटना में अपनी पत्नी और बेटे को खो चुके एक पीड़ित व्यक्ति सरकारी सहायता प्राप्त करने के लिए पारिवारिक सूची बनवाने सतगावां अंचल कार्यालय पहुंचा था। आरोप है कि कार्यालय के प्रधान सहायक बालदेव पंडित ने सूची निर्गत करने के एवज में उससे 200 रुपये ले लिए। पैसे देने के बावजूद उसका काम समय पर नहीं किया गया।
पीड़ित ने इसकी शिकायत जिला परिषद प्रतिनिधि धनंजय यादव से की। शिकायत मिलते ही धनंजय यादव अंचल कार्यालय पहुंचे और कार्यालय में मौजूद कर्मियों के सामने प्रधान सहायक को फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि आपदा से प्रभावित गरीब परिवारों से पैसे लेना बेहद शर्मनाक है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मामला बढ़ता देख प्रधान सहायक बालदेव पंडित ने पीड़ित को 200 रुपये वापस कर दिए। साथ ही पारिवारिक सूची का कार्य प्राथमिकता के आधार पर करने का आश्वासन दिया। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
घटना के बाद क्षेत्र में सरकारी कार्यालयों की कार्यशैली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना पैसे दिए सरकारी दफ्तरों में काम कराना आज भी मुश्किल बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि रिश्वतखोरी और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार सामने आती हैं, लेकिन अधिकांश मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं होने से संबंधित कर्मियों के हौसले बुलंद रहते हैं।
स्थानीय लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि विभागीय स्तर पर उदासीनता या कथित मिलीभगत के कारण शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो पाती। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। बावजूद इसके, घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र की प्रभावशीलता पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस संबंध में अंचल के वरीय अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि मामले की जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद वास्तव में कोई कार्रवाई होती है या मामला अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाता है।
यह संस्करण समाचार शैली में आरोपों को आरोप के रूप में ही प्रस्तुत करता है और तथ्य तथा टिप्पणी के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखता

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