झारसुगुड़ा में ध्वनि प्रदूषण के नियम केवल कागजों तक सीमित
अनुमति देकर जिम्मेदारी पूरी कर रहा प्रशासन, नियंत्रण से बाहर ध्वनि प्रदूषण
झारसुगुड़ा, पर्व-त्योहारों का मौसम शुरू होते ही झारसुगुड़ा शहर में पूजा-पाठ और विभिन्न धार्मिक आयोजनों का माहौल बनने लगा है। गणेश पूजा के बाद आने वाले दिनों में कई प्रमुख पर्व होने के कारण शोभायात्रा, विसर्जन जुलूस और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इसके साथ ही डीजे और तेज आवाज वाले साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर आम लोगों की चिंता भी बढ़ रही है।
पर्वों के दौरान शोभायात्राओं के लिए प्रशासन की ओर से अनुमति दी जाती है। हालांकि, अनुमति प्राप्त डीजे और साउंड सिस्टम निर्धारित ध्वनि सीमा के भीतर चल रहे हैं या नहीं, इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। शहर के कई इलाकों में लंबे समय तक तेज आवाज में डीजे बजाए जाने से सड़क किनारे स्थित घरों, दुकानों, अस्पतालों और अन्य संस्थानों पर असर पड़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के लिए निर्धारित ध्वनि सीमा तय है। आवासीय, वाणिज्यिक और शांत क्षेत्र के लिए अलग-अलग मानदंड निर्धारित हैं। रात के समय ध्वनि नियंत्रण को लेकर भी नियम लागू हैं। इसके बावजूद पर्वों के दौरान इन नियमों का प्रभावी ढंग से पालन नहीं होने की शिकायतें मिल रही हैं।
विशेषकर विसर्जन शोभायात्राओं के दौरान डीजे की तेज आवाज समस्या को और गंभीर बना देती है। मुख्य सड़कों से जुलूस गुजरने के दौरान डीजे वाहनों और लोगों की भीड़ के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित होती है। ऐसे में एंबुलेंस और अग्निशमन वाहन जैसे आपातकालीन सेवा वाहनों के भीड़ में फंसने की आशंका बनी रहती है।
कुछ स्थानों पर किस पूजा समिति का डीजे अधिक तेज आवाज में बज रहा है, इसे लेकर एक तरह की अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा की शिकायत भी सामने आती रही है। ऐसे में केवल अनुमति जारी कर देना ही प्रशासन की जिम्मेदारी पूरी नहीं करता। शोभायात्रा के दौरान नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इस पर नियमित निगरानी आवश्यक है।
ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण में पुलिस और प्रशासन के साथ प्रदूषण नियंत्रण विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। शिकायत मिलने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पर्वों से पहले ही पूजा समितियों को निर्धारित मार्ग, समय और ध्वनि सीमा के संबंध में स्पष्ट निर्देश देना आवश्यक है।
आगामी दिनों में कई अन्य पर्व और शोभायात्राएं प्रस्तावित हैं। ऐसे में अभी से डीजे और ध्वनि प्रदूषण पर कड़ी निगरानी रखने की जरूरत है। निर्धारित नियमों का उल्लंघन कर अत्यधिक ध्वनि उत्पन्न करने वाले साउंड सिस्टम के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के साथ पूजा समितियों और डीजे संचालकों को भी जिम्मेदार बनाया जाना जरूरी है। तभी पर्व-त्योहारों का उत्साह शहरवासियों के लिए स्वस्थ, सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल में कायम रह सकेगा।
झारसुगुड़ा से सुमित्रा पटनायक की रिपोर्ट, आर 9 भारत