शॉर्टेज की परंपरा बनाए रखने के लिए कई केंद्रों में 100 क्विंटल तक धान की कमी की भरपाई स्वयं करनी पड़ी समिति कर्मचारी

चित्रलेखा श्रीवास की रिपोर्ट
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शॉर्टेज की परंपरा बनाए रखने के लिए कई केंद्रों में 100 क्विंटल तक धान की कमी की भरपाई स्वयं करनी पड़ी समिति कर्मचारी

कोरबा//खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के धान खरीदी अभियान में कोरबा जिले ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट कार्यशैली का परिचय देते हुए लगातार 15वें वर्ष ‘जीरो शॉर्टेज’ का कीर्तिमान स्थापित किया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के नेतृत्व में जिले ने समर्थन मूल्य पर खरीदे गए 27 लाख 47 हजार 101.2 क्विंटल धान (लगभग 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742 रुपए) का शत-प्रतिशत परिदान कर राज्य स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है।

जिले की 41 समितियों के 65 उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 43 हजार 681 किसानों से धान खरीदी की गई। 1 दिसंबर से 31 जनवरी तक चले इस अभियान को शासन द्वारा अतिरिक्त समय दिए जाने के बाद 7 फरवरी तक पूरा किया गया। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद प्रशासन ने धान के सुरक्षित भंडारण और समय पर उठाव सुनिश्चित किया।
कलेक्टर कुणाल दुदावत लगातार मॉनिटरिंग करते रहे और कस्टम मिलिंग, डीओ जारी करने तथा उठाव की स्थिति की नियमित समीक्षा करते रहे। जिन केंद्रों में धान का स्टॉक अधिक हुआ, वहां प्राथमिकता से उठाव के निर्देश दिए गए। लापरवाह राइस मिलरों को फटकार भी लगी, जबकि समय पर कार्य करने वालों को प्रोत्साहित किया गया। इसी सख्ती और समन्वय का परिणाम रहा कि कोरबा ने जीरो शॉर्टेज का रिकॉर्ड बरकरार रखा।

धान खरीदी के एवज में समितियों को कुल 10 करोड़ 16 लाख 42 हजार 744 रुपए का भुगतान किया जाएगा। इसमें 8 करोड़ 79 लाख 7 हजार 238 रुपए कमीशन के रूप में और 1 करोड़ 37 लाख 35 हजार 506 रुपए प्रोत्साहन राशि के रूप में शामिल हैं। शासन द्वारा प्रति क्विंटल 32 रुपए कमीशन और जीरो शॉर्टेज पर 5 रुपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यह राशि समितियों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन और अन्य खर्चों का मुख्य आधार होती है।

इस अभियान में बरपाली समिति सबसे आगे रही, जहां 88 हजार 370.8 क्विंटल धान की खरीदी कर शत-प्रतिशत परिदान किया गया। इस उपलब्धि के लिए समिति को सर्वाधिक 4 लाख 41 हजार 854 रुपए प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
हालांकि इस सफलता के पीछे कई चुनौतियां भी रहीं। मार्कफेड की कमजोर परिवहन व्यवस्था के कारण जनवरी में करीब पखवाड़े भर तक धान का उठाव बंद रहा। अन्य जिलों को प्राथमिकता दिए जाने के चलते डीओ जारी होने के बावजूद उठाव प्रभावित हुआ। इसके चलते समितियों में धान के सुरक्षित रखरखाव की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। तेज धूप, मौसम की मार और भंडारण की कमी के बीच करोड़ों के धान की सुरक्षा आसान नहीं थी।

इसी दौरान एक हृदयविदारक घटना भी सामने आई, जब 5 मार्च की रात कुदमुरा उपार्जन केंद्र में धान की रखवाली कर रहे कर्मचारी राजेश सिंह की हाथी के हमले में मौत हो गई। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर दिया। बावजूद इसके, कर्मचारियों ने जोखिम उठाते हुए धान की सुरक्षा और उठाव का कार्य जारी रखा।

समिति कर्मचारियों का कहना है कि जीरो शॉर्टेज की परंपरा बनाए रखने के लिए कई केंद्रों में 100 क्विंटल तक धान की कमी की भरपाई स्वयं करनी पड़ी। ऐसे में उन्हें समय पर कमीशन और प्रोत्साहन राशि मिलने की उम्मीद है, ताकि वे अपने वेतन और अन्य खर्चों का निर्वहन कर सकें।

कुल मिलाकर, तमाम बाधाओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद कोरबा जिले ने धान खरीदी अभियान में अनुकरणीय प्रदर्शन करते हुए एक बार फिर अपनी विश्वसनीयता और कार्यकुशलता साबित की है

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