बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट
करमा झारखंडी संस्कृति, प्रकृति और सामाजिक एकता का महापर्व : जयराम महतो
बोकारो :भादो मास की एकादशी के अवसर पर मंगलवार को प्रखंड के बोआ डूंगरी में करम महोत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जेएलकेएम सुप्रीमो सह डुमरी विधायक जयराम महतो ने कहा कि करमा झारखंडी समाज की संस्कृति और अस्मिता से गहराई से जुड़ा महापर्व है। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, भाई-बहन के प्रेम और सामाजिक एकता का प्रतीक है।उन्होंने कहा कि करमा देवता को प्रकृति, फसल और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। करम पर्व पर बहनें अपने भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगलकामना के लिए करम डाली और जावा की पूजा करती हैं। कुंवारी युवतियां एवं विवाहित महिलाएं टोकरी में जौ, गेहूं और चना बोकर जावा तैयार करती हैं और सात दिनों तक उसकी विधिवत सेवा करती हैं।
जयराम महतो ने कहा कि करम की रात गांव के अखरा में करम डाली स्थापित की जाती है। इसके बाद ढोल-मांदर की थाप पर रातभर करमा-धुरमा गीत और नृत्य का आयोजन होता है। इन गीतों में प्रकृति, पेड़-पौधों, खेत-खलिहान तथा भाई-बहन के प्रेम की झलक देखने को मिलती है। सुबह महिलाएं जावा को नदी या तालाब में विसर्जित करती हैं और भाइयों को जावा देकर उनका आशीर्वाद लेती हैं।उन्होंने कहा कि करमा पर्व सामाजिक समरसता और एकता का भी संदेश देता है। इस दिन गांव के लोग जाति-धर्म का भेद भूलकर अखरा में एक साथ नाचते-गाते हैं। करमा पर्व प्रकृति संरक्षण की परंपरा को भी मजबूत करता है। करम डाली काटने से पहले उसकी पूजा करना प्रकृति और पेड़-पौधों के प्रति सम्मान की भावना को दर्शाता है।मौके पर जेएलकेएम के केंद्रीय महासचिव अर्जुन रजवार समेत पार्टी के कई कार्यकर्ता एवं ग्रामीण मौजूद थे।