छत्तीसगढ़ रायगढ़ से=ब्यूरो चीफ महेंद्र अग्रवाल R 9 भारत #हरेली अमावस्या को शनिदेव रुद्राभिषेक महोत्सव का हुआ समापन …..

श्री शनिदेव रुद्राभिषेक महोत्सव श्रावणी हरेली अमावस्या
रियासत कालीन सिद्ध पीठ श्री शनिदेव मंदिर रायगढ़ में हरेली अमावस्या के पावन पर्व पर भगवान श्री शनिदेव जी रुद्राभिषेक महोत्सव का आयोजन बडे धूम धाम के समापन सिद्ध पीठ श्री शनि देव मंदिर के प्रमुख आचार्य अभिषेक कुमार शर्मा ने बताया कि हरेली अमावस्या के दिन मंदिर में सूर्यपुत्र शनिदेव जी की पूजा अराधना रियासत काल से बड़े उत्साह एवं बड़ी श्रद्धा के साथ हो रही है। आगामी 28 से 31 जुलाई तक चार दिवसीय श्री शनिदेव रूद्राभिषेक महोत्सव की बड़ी श्रद्धा के साथ घूम रही व उनकी विशेष पूजा अर्चना की गई।
निकलगी भव्य कलश यात्रा:- प्रमुख आचार्य ने बताया कि प्रथम दिवस हरेली अमावस्या दिनांक 28 जुलाई दिन गुरूवार का दोपहर 2.00 बजे शहर के मार्ग से होते हुए भव्य कलश यात्रा निकाली निकाली गई जिसमें श्रद्धालुगण माता व बहनें बड़े उत्साह के साथ भाग लिया व रात्रि 8 बजे मनोकामना अखण्ड ज्योति श्रद्धालुगण द्वारा प्रज्जवलित किया
द्वितीय दिवस 29 जुलाई दिन शुक्रवार श्री गुरूचरण पादुका पूजन के साथ श्री शनि मंत्र का जाप आचार्य व पंडितो द्वारा किया गया श्री शनिदेव जी का रुद्राभिषेक (सरसो तेल से) श्रद्धालुगण द्वारा किया गया । तृतीय दिवस दिनांक 30 जुलाई दिन शनिवार प्रातः 8.00 बजे से 11.30 बजे
तक (विश्वशांति महायज्ञ हवन पूजन) 12.00 बजे पूर्णाहुति इसके पश्चात् 12 से 4 बजे तक महाप्रसाद वितरण (भंडारा)
रात्रि 8.00 बजे भजन कीर्तिन की विशेष धूम रही । चतुर्थ दिवस 31 जुलाई प्रातः 7.00 बजे विर्सजन 10 बजे द्ररिद्रनारायण भोज के साथ श्री शनिदेव रूद्राभिषेक महोत्सव का समापन हुआ ।
श्रद्धालुगण में है उत्साह
रियासत कालीन सिद्ध पीठ श्री शनिदेव मंदिर में हरेली अमावस्या को आयोजित हो रहे रूद्राभिषेक महोत्सव में शहर
के श्रद्धालुगण में अधिक उत्साह नजर आ रहा है । वही महोत्सव में सम्मलित होने उस दिन दूर-दूर से धर्मपरायण
श्रद्धालुगण सनातन धर्म के अनुसार शनिग्रह शांति के लिए दर्शनार्थ श्री शनिदेव मंदिर पहुँचेगे व पूजा अर्चना कर व दर्शन
कर हवन विभूति मस्तक पर लगाकर शान्ति प्राप्त करते है
श्री शनिदेव जी रुद्राभिषेक महत्व
भगवान शंकर द्वारा श्री शनिदेव जी अधोर व कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर श्रावणी मास की हरियाली अमावस्या के अति
विशिष्ट वरदान दिया और कहा –
’’ हे सूर्य पुत्र शनिदेव! कलयुग में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का साम्राज्य आपके अधीन होगा । ग्रह देवी देवता मनुष्य, साधु, संत ,
भूत प्रेत, तंत्र मंत्र यंत्र मनुष्यों के कर्मों के अनुसार मैं शनि के रूप में दण्ड दूँगा मेरी सम्पूर्ण संहारक शक्ति स्वरूप से
सुसज्जित होकर आप तीनों लोकों परम न्यायाधीश होगे
तब से आज पर्यन्त मानव भगवान श्री शनिदेव की पूजा अर्चना विधि विधान से करते आ रहे है
आभार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से सहयोग करने वाले सभी श्रद्धालुगण जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन मीडिया जगत का आभार व्यक्त किया