जलवायु परिवर्तन के बीच जल संरक्षण और बेहतर आजीविका पर मंथन।

बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट

जलवायु परिवर्तन के बीच जल संरक्षण और बेहतर आजीविका पर मंथन।

सारथी स्थापना दिवस पर जिला स्तरीय जलवायु अखड़ा 2026 का आयोजन।

बोकारो जिला के जरिडीह प्रखंड के बहादुरपुर में गुरुवार को सारथी के स्थापना दिवस के अवसर पर बहादुरपुर स्थित सहयोगिणी कार्यालय में जिला स्तरीय “जलवायु अखड़ा 2026” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन,जल,जंगल,जमीन, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण एवं सतत आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभिन्न पंचायतों से आए पंचायत प्रतिनिधि, ग्रामीण, किसान,महिलाएं, युवा एवं सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर गांवों की खेती, जल स्रोतों और ग्रामीण आजीविका पर लगातार बढ़ता जा रहा है। ऐसे समय में समुदाय आधारित योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के संरक्षण के जरिए ही स्थायी समाधान संभव है। कार्यक्रम में “रीच टू वैली” मॉडल के माध्यम से जल संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। मुख्य वक्ता गुलाब चंद्र,गौतम सागर, पीयूषमय,जुबा,विष्णुचरण महतो आदि वक्ताओं ने बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों से लेकर निचले इलाकों तक जल संरक्षण की समग्र योजना बनाकर जल संकट को कम किया जा सकता है।दामोदर बचाओ अभियान के गुलाब चंद्र ने अपने संबोधन में कहा कि जलवायु परिवर्तन आज केवल पर्यावरण का नहीं बल्कि लोगों की आजीविका और भविष्य का भी बड़ा संकट बन चुका है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के बिना ग्रामीण समाज का विकास संभव नहीं है। उन्होंने समुदायों से प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय खेती को बढ़ावा देने और जल संरक्षण के प्रति जागरूक होकर सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने यह भी कहा कि यदि पर्यावरण संरक्षण को ग्रामीणों की आय और रोजगार से जोड़ा जाए, तो लोग अधिक जिम्मेदारी के साथ इस दिशा में कार्य करेंगे।प्रदान संस्था से जुबा प्रतीम गोगई ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जल संरक्षण,बेहतर आजीविका और पंचायतों की सक्रिय भागीदारी एक-दूसरे से जुड़े हुए मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत विकास योजना एवं गांव आधारित प्लान के सहयोग से गांवों की जरूरतों के अनुसार योजनाएं तैयार कर जल संरक्षण, खेती और रोजगार के क्षेत्र में बेहतर कार्य किया जा सकता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने की अपील की।
कार्यक्रम में चर्चा की गई कि मनरेगा एवं अन्य सरकारी योजनाओं के तहत तालाब, डोभा और जल संरचनाओं का निर्माण कर जल स्तर में सुधार लाया जा सकता है। इससे किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने के साथ-साथ मत्स्य पालन, बत्तख पालन और अन्य स्वरोजगार के अवसर भी विकसित होंगे। वक्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को ग्रामीणों की आजीविका से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।इस दौरान जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने पर भी जोर दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि स्थानीय वनस्पतियों, जल स्रोतों और पारंपरिक कृषि पद्धतियों के संरक्षण से ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित किया जा सकता है। कार्यक्रम में सारथी द्वारा पिछले वर्षों में किए गए सामाजिक कार्यों की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की गई।कार्यक्रम में विभिन्न सामाजिक संगठन सहयोगिनी, पांचसूत्र फाउंडेशन,ग्रीन लाइन फाउंडेशन,प्रदान,आशा किरण वेलफेयर सोसाइटी, अनमोल दृष्टि, महिला कल्याण समिति आदि संस्थाओं से कल्याणी सागर,विनोद कुमार यादव, प्रीति रंजन, डा श्याम कुमार भारती, विजय कुमार महतो, तारकेश्वर कुमार, मुखिया निहारिका स्वीकृति, तारामणि देवी, रामवृक्ष मुर्मू, सोनाराम मुर्मू, विष्णु चरण महतो, पंचानन महतो , कुमारी किरण, रवि कुमार राय, मंजू देवी, सूर्यमणि देवी, प्रकाश महतो, अनिल हेंब्रम, सोनी कुमारी, विनीता देवी, रेखा देवी, संगीता देवी, पुष्पा देवी, विकास गोस्वामी,अभय सिंह,नीतू सिंह लबनी घोष,आदि उपस्थित रहे।अंत में प्रतिभागियों ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने के लिए सामुदायिक स्तर पर मिलकर कार्य करने तथा जल–जंगल–जमीन और बेहतर आजीविका के संरक्षण हेतु 35 ग्राम पंचायत के साथ कार्य प्रारंभ करने का एक्शन प्लान तैयार गया।

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