डीएवी कथारा में CCL विद्या सारथी कोचिंग का भव्य शुभारंभ, ग्रामीण बच्चों को मिलेगी इंजीनियरिंग-मेडिकल की नि:शुल्क तैयारी

बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट

डीएवी कथारा में CCL विद्या सारथी कोचिंग का भव्य शुभारंभ, ग्रामीण बच्चों को मिलेगी इंजीनियरिंग-मेडिकल की नि:शुल्क तैयारी

बोकारो जिले के डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में शनिवार 26 सितंबर को सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड की महत्वाकांक्षी सीएसआर पहल “CCL विद्या सारथी” कोचिंग एवं मार्गदर्शन कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ किया गया। इस योजना के तहत CCL कमांड एरिया के विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की नि:शुल्क और गुणवत्तापूर्ण तैयारी कराई जाएगी।समारोह की शुरुआत विद्यालय परिवार द्वारा मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों के स्वागत से हुई। पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी मंचासीन अतिथियों को हरित पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। इसके बाद अतिथियों और प्राचार्य द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।दीप प्रज्वलन के बाद डीएवी गान, सीसीएल गान, सरस्वती वंदना और स्वागत गीत की मनमोहक प्रस्तुतियां हुईं।
विद्यालय के प्राचार्य सह झारखंड जोन-I के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी डॉ. जी. एन. खान ने सभी का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अंक लाना नहीं बल्कि चरित्र और नैतिक मूल्यों का निर्माण है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यह अपने भविष्य को संवारने का स्वर्णिम अवसर है, इसका शत प्रतिशत लाभ उठाएं।
मुख्य अतिथि कथारा क्षेत्र के जीएम ऑपरेशन विनोद कुमार ने कहा कि CCL विद्या सारथी योजना क्षेत्र के ग्रामीण और होनहार बच्चों के सपनों को पंख देने का सराहनीय प्रयास है। छात्र लगन से पढ़ाई कर अपने माता-पिता, विद्यालय और क्षेत्र का नाम रोशन करें।इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में सीएसआर नोडल ऑफिसर तबरेज आलम, सीएसआर मैनेजर अनुराग कुमार, जीएम के तकनीकी सहायक राहुल कुमार, डीएवी ललपनिया के प्राचार्य तन्मय बनर्जी, डीएवी स्वांग के वरिष्ठ शिक्षक निर्मल बेहुरा, NCSM समन्वयक शुभोजीत गुप्ता, विद्या सारथी के रसायन शिक्षक रविंद्र महतो और गणित शिक्षक विजय कुमार जो आईआईटी भिलाई के पूर्व छात्र हैं, उपस्थित रहे।कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन वरिष्ठ शिक्षक जितेंद्र दुबे ने किया और वैदिक शांति पाठ के साथ समापन हुआ।पूरे कार्यक्रम को सफल बनाने में पंकज कुमार, नागेंद्र प्रसाद, डॉ आर. एस. मिश्रा, टी. एम. पाठक, राकेश रंजन, बी. के. दसौंधी, आराधना, ओशीन, सुमन कुमारी, ममता पात्रा, अर्शिया एजाज सहित सभी शिक्षकों का सराहनीय योगदान रहा।

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