बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट
कथारा में पांच दिनों बाद समाप्त हुआ अवार्डी मजदूरों का आमरण अनशन, सीसीएल प्रबंधन ने दिया नियोजन का आश्वासन।

बोकारो जिला के सीसीएल कथारा महाप्रबंधक कार्यालय के समक्ष 25 मई से जारी अवार्डी मजदूरों का आमरण अनशन 29 मई 2026 शुक्रवार को प्रशासनिक पहल और प्रबंधन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। अनशन समाप्ति के दौरान कथारा महाप्रबंधक एकेबी सिंह, बेरमो एसडीओ मुकेश मछुआ, गोमिया सीओ आफताब आलम, कथारा ओपी प्रभारी राजेश प्रजापति बीटीपीएस थाना प्रभारी पिंकू यादव मौजूद रहे। प्रबंधन की ओर से अनशनकारी मजदूरों को आश्वस्त किया गया कि आगामी तीन महीनों के भीतर सीजीआईटी (सेंट्रल गवर्नमेंट इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल) कोर्ट में उनके दस्तावेजों और पहचान का वेरिफिकेशन कराने में सीसीएल प्रबंधन सहयोग करेगा। वेरिफिकेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें नियोजन उपलब्ध कराया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद मजदूरों ने पांचवें दिन अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया। बताया जाता है कि वर्ष 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने 324 मजदूरों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए सीसीएल प्रबंधन को उन्हें नौकरी देने का निर्देश दिया था। इसके बाद 142 मजदूरों को जॉइनिंग दे दी गई, जबकि 182 मजदूर नौकरी के लाभ से वंचित रह गए। बाद में मामला तब और गंभीर हो गया जब कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वास्तविक लाभुकों की जगह अन्य लोगों को नौकरी दे दी गई है। आरोपों के बाद सीसीएल प्रबंधन ने पहले से कार्यरत 142 मजदूरों को नौकरी से हटा दिया तथा मामले की जांच और पहचान सत्यापन के लिए ट्रिब्यूनल कोर्ट का गठन किया गया। प्रबंधन की ओर से कहा गया कि कोर्ट द्वारा सत्यापन के बाद ही संबंधित मजदूरों को पुनः जॉइनिंग दी जाएगी। उसी लंबित मामले में बचे 182 मजदूरों में से महेंद्र रजक, पिता स्व. देवकी रजक, आवार्डी नंबर-08 CLCS, कालेश्वर प्रजापति, पिता स्व. हुलास प्रजापति, आवार्डी नंबर-206 BCP, श्रीमती देवी, पति शिवराम निषाद, आवार्डी नंबर-24 BPC तथा शिवराम निषाद, पिता स्व. सुखदेव निषाद, आवार्डी नंबर-23 BPC ने दावा किया कि धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट द्वारा किए गए वेरिफिकेशन में उन्हें मूल उम्मीदवार माना गया है। इसके बावजूद नियोजन नहीं मिलने से नाराज होकर वे 25 मई को महाप्रबंधक कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठ गए थे।अनशनकारियों ने कहा कि वर्षों से न्याय की लड़ाई लड़ने के बावजूद उन्हें अब तक रोजगार नहीं मिल सका है। उनका कहना था कि ट्रिब्यूनल कोर्ट से सत्यापन के बाद भी प्रबंधन की ओर से कार्रवाई नहीं की जा रही थी, जिसके कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। शुक्रवार को प्रशासनिक अधिकारियों और सीसीएल प्रबंधन के साथ हुई वार्ता के बाद सकारात्मक पहल हुई। अधिकारियों ने मजदूरों को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं का समाधान नियमसम्मत तरीके से किया जाएगा और वेरिफिकेशन प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने दी जाएगी। अनशन समाप्त होने के बाद मजदूरों और उनके समर्थकों में संतोष देखा गया। मौके पर सीसेल प्रबंधन की तरफ से वरीय कार्मिक पदाधीकारी सम्भीरज सिंह, सूर्य प्रताप सिंह, ए एमओ डॉ निशा तप्पो, डॉ यादव व क्षेत्र के कई सामाजिक कार्यकर्ता, मजदूर प्रतिनिधि और स्थानीय लोग भी उपस्थित थे। पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में दिनभर चर्चा का माहौल बना रहा।