बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट
कथारा में सीएमपीडीआई की ड्रिलिंग तेज, सातवें बोरहोल तक कोयले की मौजूदगी के मिले संकेत।
:बोकारो जिला क़े कथारा क्षेत्र में भविष्य की कोयला परियोजनाओं और भंडार के आकलन को लेकर सीएमपीडीआई (सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट) द्वारा भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण एवं कोर ड्रिलिंग का कार्य युद्धस्तर पर जारी है। इन दिनों कथारा स्थित कमल टोला सब-स्टेशन के समीप सीएमपीडीआई की टीम ड्रिलिंग कार्य में जुटी हुई है। क्षेत्र में लगातार चल रही इस गतिविधि को लेकर स्थानीय लोगों की भी उत्सुकता बढ़ गई है।कार्यस्थल पर मौजूद क्षेत्र प्रभारी वशिम अकरम ने बताया कि पिछले लगभग तीन महीनों के दौरान उनकी टीम सातवें बोरहोल की ड्रिलिंग कर रही है। उन्होंने बताया कि अब तक जिन स्थानों पर ड्रिलिंग की गई है, वहां पत्थर और मिट्टी की विभिन्न परतों के साथ-साथ कोयले की भी मौजूदगी मिली है। इससे क्षेत्र में कोयला भंडार होने के संकेत और मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि ड्रिलिंग का कार्य कब तक चलेगा, क्योंकि इसकी अवधि तकनीकी सर्वेक्षण और भूगर्भीय परिस्थितियों पर निर्भर करती है। हालांकि अब तक के सर्वेक्षण के आधार पर इतना स्पष्ट है कि इस पूरे क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में कोयला मौजूद है। आगे की विस्तृत जांच,कोर सैंपलों के विश्लेषण और तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही कोयला भंडार की वास्तविक मात्रा एवं उसकी गुणवत्ता का आकलन किया जा सकेगा।जानकारी के अनुसार, सीएमपीडीआई की ओर से किए जा रहे इस भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण का उद्देश्य भूमिगत कोयला भंडार की स्थिति, उसकी गहराई, मोटाई एवं गुणवत्ता का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर भविष्य में खनन परियोजनाओं की योजना तैयार की जाएगी। यदि सर्वेक्षण के परिणाम अनुकूल रहे तो आने वाले समय में कथारा क्षेत्र में नई खनन परियोजनाओं को गति मिल सकती है, जिससे कोयला उत्पादन बढ़ने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होने की संभावना है। सीएमपीडीआई की टीम फिलहाल निर्धारित स्थानों पर चरणबद्ध तरीके से ड्रिलिंग का कार्य कर रही है। प्रत्येक बोरहोल से निकाले जा रहे कोर सैंपलों को सुरक्षित रखकर वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सर्वेक्षण पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप किया जा रहा है और अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद ही क्षेत्र में उपलब्ध कोयला भंडार की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।