विकास या सरकारी धन का दुरुपयोग?” अडबन्धा तालाब की दोबारा खुदाई पर जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल।

बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट

विकास या सरकारी धन का दुरुपयोग?” अडबन्धा तालाब की दोबारा खुदाई पर जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल। मधुकरपुर पंचायत के अडबन्धा तालाब पुनः जीर्णोद्धार योजना को लेकर बढ़ा विरोध, स्कूल के बच्चों की सुरक्षा पर भी चिंता।

 

बोकारो जिला के कसमार प्रखंड अंतर्गत मधुकरपुर पंचायत के प्रसिद्ध अडबन्धा तालाब के पुनः जीर्णोद्धार कार्य को लेकर पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने सवाल खड़े किए हैं। पंचायत समिति सदस्य इंद्रजीत पांडे एवं वार्ड सदस्य राहुल स्वर्णकार ने संयुक्त रूप से इस योजना पर आपत्ति जताते हुए इसे सरकारी धन के दुरुपयोग से जोड़कर जांच की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि लगभग सात वर्ष पूर्व इस तालाब का जीर्णोद्धार कराया गया था, जिसमें 10 से 12 फीट तक गहरी खुदाई की गई थी। वर्तमान में तालाब से ग्रामीणों को सिंचाई,स्नान एवं मत्स्य पालन जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। बावजूद इसके दोबारा तालाब की गहरी खुदाई का शिलान्यास किया जाना समझ से परे है।पंचायत समिति मेंबर इंद्रजीत पांडे ने कहा कि अगर तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाता, घाट बनाया जाता या आसपास सुविधाएं विकसित की जातीं तो पंचायत की सुंदरता बढ़ती और जनता को लाभ मिलता। लेकिन पहले से गहरे तालाब को और अधिक गहरा करना उचित नहीं लगता। जनता के पैसे का सही उपयोग होना चाहिए।वहीं वार्ड सदस्य राहुल स्वर्णकार ने कहा कि
“तालाब पहले से ही काफी गहरा है। इसे 20–25 फीट तक और गहरा करने से दुर्घटना की आशंका बढ़ जाएगी। सबसे बड़ी चिंता यह है कि तालाब के बिल्कुल बगल में सरकारी स्कूल स्थित है, जहां छोटे-छोटे बच्चे पढ़ाई करते हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अगर समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।उन्होंने पंचायत के अन्य जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता की असुविधा और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सभी को खुलकर बोलना चाहिए।
दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि विकास योजनाओं के नाम पर बिना आवश्यकता के कार्य कराना उचित नहीं है। उन्होंने युवाओं एवं ग्रामीणों से पंचायत की धरोहर और आमजन की सुरक्षा के लिए जागरूक होने की अपील की।अडबन्धा तालाब को लेकर उठे इन सवालों के बाद पंचायत क्षेत्र में योजना की उपयोगिता एवं पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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