विस्थापितों के आंदोलन से ठप हुआ बीकेटी आउटसोर्सिंग का काम, प्रबंधन के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना।

बोकारो से ब्यूरो अनिल बरनवाल कि रिपोर्ट

विस्थापितों के आंदोलन से ठप हुआ बीकेटी आउटसोर्सिंग का काम, प्रबंधन के आश्वासन पर समाप्त हुआ धरना।

 

बोकारो जिला के कथारा कोलियरी में संचालित बीकेटी आउटसोर्सिंग कंपनी के खिलाफ 10 जून बुधवार को विस्थापितों का आक्रोश फूट पड़ा। जनता मजदूर संघ के बैनर तले हजरत अंसारी के नेतृत्व में दर्जनों विस्थापितों ने कंपनी के कार्यस्थल पर पहुंचकर कामकाज बंद करा दिया। आंदोलनकारियों का आरोप था कि कंपनी स्थानीय विस्थापितों की अनदेखी कर बाहरी लोगों को रोजगार दे रही है, जबकि परियोजना से प्रभावित परिवारों का रोजगार पर पहला अधिकार बनता है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हजरत अंसारी ने कहा कि कोल परियोजनाओं के विस्तार के दौरान स्थानीय लोगों ने अपनी जमीन और संसाधनों का त्याग किया है। इसके बावजूद रोजगार के मामले में उन्हें लगातार उपेक्षित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बीकेटी आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा विस्थापितों को दरकिनार कर बाहरी लोगों की बहाली की जा रही है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विस्थापितों को प्राथमिकता नहीं दी गई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। अचानक कार्य बंद होने से कंपनी प्रबंधन से लेकर कोलियरी प्रशासन तक हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही कथारा कोलियरी के परियोजना पदाधिकारी रणजीत कुमार मौके पर पहुंचे और आंदोलनकारियों से वार्ता की। इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए कथारा क्षेत्र के महाप्रबंधक ए.के.बी. सिंह ने भी हस्तक्षेप किया। वार्ता के दौरान महाप्रबंधक ने आंदोलनकारियों को आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा तथा विस्थापितों को रोजगार से संबंधित समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने आंदोलनकारियों से कुछ दिनों का समय देने का आग्रह किया और कहा कि प्रबंधन सकारात्मक पहल करते हुए सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेगा। प्रबंधन के आश्वासन के बाद आंदोलनकारी शांत हुए और अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। इसके बाद आउटसोर्सिंग कंपनी का कामकाज पुनः शुरू हो सका। मौके पर मो इम्तियाज अंसारी, अनीस राजा, ख्वाजा नूर, साहिन अंसारी, एनुल हक़, शकलेंन, अफरोज, माशूक, व शकील राजा सहित दर्जनों बिस्तापित मौजूद थे।

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