अब महिला प्रताड़ना एवं पोक्सो के झूठे मुकदमे दर्ज कराने वालों की खैर नहीं, मामला झूठा पाया गया तो पुलिस फरियादियों के खिलाफ करेगी कार्रवाई।
जिले भर में 01 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक जिले में महिला अत्याचार के दर्ज हुए कुल 249 प्रकरणों में से 86 प्रकरण अनुसंधान में पाये गये है झूठे।

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पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान के निर्देशन में जिले में झूठे मुकदमे दर्ज करवाने वालों के खिलाफ धौलपुर पुलिस द्वारा अब सख्त कानूनी कार्रवाई (जीरो टॉलरेंस नीति) अपनाई जा रही है। जिले में अब महिला अत्याचार व पोक्सो के प्रकरण केवल एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर फाइल बंद नहीं होगी, बल्कि झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने वालों को कोर्ट से सजा दिलाने तक पुलिस पीछा करेगी। पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान ने बताया है कि झूठे मुकदमे दर्ज कराकर पुलिस संसाधनों की बर्बादी किया गया है कि किसी भी निर्दोष व्यक्ति को झूठे मुकदमों में फंसाकर परेशान करने वालों को अब बख्शा नहीं जाएगा। पिछले दिनों पुलिस महानिदेशक राजस्थान द्वारा भी सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि द्वेषवश, दबाव बनाने या प्रताड़ित करने की नीयत से झूठी रिपोर्ट देने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ऐसे मामलों में अब केवल एफआर लगाने तक सीमित न रहकर संबंधित फरियादी के विरुद्ध भी न्यायालय में परिवाद पेश किया जाएगा। झूठी एफआईआर या फर्जी आरोप लगाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा। झूठे मामलों के कारण निर्दोष व्यक्तियों की सामाजिक प्रतिष्ठा, समय एवं मानसिक स्थिति प्रभावित होने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। जांच में मामला झूठा पाए जाने पर न्यायालय में एफआर पेश करने के साथ-साथ शिकायतकर्ता के खिलाफ भी इस्तगासा पेश किया जाएगा। पुलिस विभाग द्वारा निष्पक्ष अनुसंधान एवं आधुनिक तकनीक के माध्यम से वास्तविक पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। जिले भर में 01 जनवरी 2026 से 30 अप्रैल 2026 तक जिले में महिला अत्याचार के दर्ज हुए कुल 249 प्रकरणों में से 86 प्रकरण अनुसंधान में झूठे पाये गये है।
उदाहरण के तौर पर पुलिस थाना महिला धौलपुर में दर्ज प्रकरण संख्या 03/2025 में परिवादिया द्वारा लगाए गए आरोपों की पुलिस द्वारा गंभीरता से जांच की गई। अनुसंधान के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपित पक्ष के व्यक्तियों द्वारा मारपीट, गाली-गलौज अथवा दुष्कर्म जैसी कोई घटना कारित किया जाना प्रमाणित नहीं हुआ। जांच में परिवादिया द्वारा लगाए गए आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाने तथा मामला असत्य एवं झूठा पाया गया।
प्रकरण में पुलिस द्वारा एफआर न्यायालय में पेश की गई, जिसे न्यायालय द्वारा स्वीकार भी कर लिया गया। साथ ही झूठा मामला दर्ज करवाकर पुलिस एवं न्यायालय का समय बर्बाद करने पर संबंधित फरियादी के खिलाफ भी विधिसम्मत कानूनी कार्रवाई हेतु इस्तगासा न्यायालय में पेश किया गया है। धौलपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि किसी भी प्रकार की झूठी, भ्रामक अथवा द्वेषपूर्ण शिकायत दर्ज न करवाएं। पुलिस हर पीड़ित को न्याय दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन झूठे मुकदमे दर्ज कर निर्दोष लोगों को परेशान करने वालों के खिलाफ भी अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधीक्षक श्री विकास सांगवान ने बताया है कि इसका मुख्य उदेश्य पुलिस संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित करना है। झूठी शिकायतों की जांच में पुलिस का कीमती समय और ऊर्जा बर्बाद होती है, जिससे वास्तविक पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी होती है। अब सख्ती होने से न केवल निर्दोष लोग प्रताड़ना से बचेंगे, बल्कि पुलिस का ध्यान गंभीर अपराधों के नियंत्रण पर केंद्रित हो सकेगा। ब्यूरो चीफ मनोज राघव धौलपुर